करवा चौथ पूजा

करवा चौथ एक महिलाओं द्वारा भारतीय परंपरागत पूजा और व्रत है, जिसका उद्देश्य उनके पति की लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति करना होता है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारतीय राज्यों, जैसे कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और दिल्ली में मनाया जाता है। करवा चौथ का आयोजन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथ तिथि को किया जाता है, जो चांद के दर्शन के बाद होती है।

करवा चौथ के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, जिसमें वे दिन भर बिना भोजन किए रहती है। व्रत का उद्यापन चांद के दर्शन के बाद किया जाता है, और इसमें पति की प्रतिमा या फोटो के साथ पूजा की जाती है।

करवा चौथ पूजा की सामग्री और पूजा विधि कुछ इस प्रकार होती है:

सामग्री:

  1. सिंदूर, मेहंदी, सूहाग, और सुहागन का बैच (सुहागन का वैच महिलाओं के पास होता है)।
  2. फूल, गोलू, चावल, दीपक, और बत्ती ।
  3. नैवेद्य के रूप में फल, मिठाई और साकारी आहार ।
  4. करवा चौथ की कथा (पूजा के समय पठने के लिए)।
  5. करवा चौथ की थाली (इसमें सामग्री रखी जाती है)।

पूजा की विधि:

  1. सुबह संध्या के समय, महिलाएं समृद्धि और सौभाग्य के लिए अपने व्रत की शुरुआत करती हैं।
  2. पूजा स्थल को तैयार करने के बाद, करवा चौथ की कथा को पढ़ती है और फिर व्रत करती हैं।
  3. चांद दिखाई देने पर पूजा को खत्म करती हैं और पति की तस्वीर या मूर्ति के साथ पूजा करती हैं।
  4. पूजा के बाद, पति के हाथ से व्रत को तोड़ती हैं।

करवा चौथ पूजा के बाद महिलाएं एक चांद के दर्शन करके अपने पति की प्रतिमा या फोटो के साथ पूजा करती हैं और फिर व्रत को खोलती हैं। इस दिन की खासतर शाम को महिलाएं अपने सुहाग के साथ बात करती हैं और विभिन्न परंपरागत गानों और कविताओं के साथ इस पर्व का मनाने का आनंद लेती हैं।

करवा चौथ एक महिलाओं के बीच एकता, सौहार्द, और प्रेम का प्रतीक होता है, और यह परंपरागत तौर पर समाज में बड़ा महत्त्वपूर्ण है।

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